International Journal of Multidisciplinary Futuristic Development
भारतीय ज्ञान परंपरा: लोक संस्कृति और लोक साहित्य
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This is an author-deposited copy. The version of record was originally published elsewhere: Originally published in International Journal of Multidisciplinary Futuristic Development, Volume 7, Issue 1, 2026. DOI 10.54660/IJMFD.2025.6.1.125-126 . Original source: https://www.transdisciplinaryjournal.com/archives/year-2026.vol-7.issue-1.
Abstract
भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार लोक जीवन, लोक अनुभव और सामूहिक स्मृति में निहित है। लोक संस्कृति और लोक साहित्य इस परंपरा की जीवंत अभिव्यक्तियाँ हैं, जिन्हें किसी एक जाति, समुदाय या भौगोलिक सीमा में बाँधकर नहीं देखा जा सकता। लोक ज्ञान विज्ञान से भिन्न होते हुए भी उससे कमतर नहीं है, क्योंकि यह अनुभव, अंतःप्रज्ञा और प्रकृति के साथ सहजीवन पर आधारित होता है। यह शोध-पत्र लोक संस्कृति की अविभाज्यता, उसके संरक्षण तंत्र, लोक ज्ञान और वैज्ञानिक ज्ञान के अंतर, तथा ‘जाँता का गीत’ जैसे उदाहरणों के माध्यम से लोक साहित्य की लोकतांत्रिक चेतना को विश्लेषित करता है। साथ ही यह प्रतिपादित करता है कि लोक केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक मानवीय मूल्यों का संवाहक है, जिसका केंद्र प्रकृति, मनुष्यता और प्राणीमात्र का कल्याण है।
Keywords: भारतीय ज्ञान परंपरालोक संस्कृतिलोक साहित्यलोक ज्ञानअंतःप्रज्ञाजाँता का गीतलोकतंत्रप्रकृतिमनुष्यता
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