International Journal of Multidisciplinary Evolutionary Research
भारतीय ज्ञान परंपरा: विविधता में एकता की साधना
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This is an author-deposited copy. The version of record was originally published elsewhere: Originally published in International Journal of Multidisciplinary Evolutionary Research, Volume 5, Issue 1, 2024. DOI 10.54660/IJMER.2024.5.1.121-123 . Original source: https://www.internationalmultiresearch.com/archives/year-2024.vol-5.issue-1.
Abstract
भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की उन विरल परंपराओं में से एक है, जिसने विविधता को विभाजन का कारण नहीं, बल्कि एकता की साधना का माध्यम माना। यह परंपरा निरंतर ज्ञान-साधना, संवाद, ग्रहणशीलता और समन्वय पर आधारित रही है। इसमें धर्म, दर्शन, विज्ञान, कला, साहित्य, संगीत और स्थापत्य—सभी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सहयात्री रहे हैं। भारतीय नवजागरण का स्वरूप भी इसी कारण पाश्चात्य नवजागरण से भिन्न दिखाई देता है, जहाँ धर्म और विज्ञान के बीच टकराव के बजाय संवाद और सह-अस्तित्व का मार्ग अपनाया गया। यह शोध-पत्र भारतीय ज्ञान परंपरा की इसी समन्वयकारी, लोकतांत्रिक और मानव-केंद्रित दृष्टि का विश्लेषण करता है, जिसमें आस्तिक–नास्तिक दर्शनों, चार पुरुषार्थों, मंदिर कला, योग, बौद्ध चिंतन, सामाजिक समरसता और सर्वधर्म सम्भाव की अवधारणाओं को केंद्र में रखा गया है।
Keywords: भारतीय ज्ञान परंपराविविधता में एकतानवजागरणधर्म और विज्ञानसर्वधर्म सम्भावचार पुरुषार्थभारतीय कला
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